घरघोड़ा: “पढ़ने-लिखने की कोई उम्र नहीं होती”, इस कहावत को आज घरघोड़ा के विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय में चरितार्थ होते देखा गया। साक्षर भारत अभियान के तहत आयोजित महापरीक्षा में क्षेत्र के दर्जनों बुजुर्गों ने बड़े उत्साह के साथ हिस्सा लिया।
कलम थामे नजर आए झुर्रियों वाले हाथ
आज सुबह से ही घरघोड़ा बीईओ कार्यालय परिसर में एक अलग ही रौनक देखने को मिली। परीक्षा केंद्र पर पहुंचे परीक्षार्थियों में युवाओं जैसी घबराहट नहीं, बल्कि कुछ नया सीखने का गर्व और चेहरे पर मुस्कान थी। जिन हाथों ने दशकों तक हल चलाया या घर-गृहस्थी संभाली, आज वही हाथ कलम थामकर कागज पर अपना नाम और अक्षर उकेरते नजर आए।
परीक्षा का मुख्य उद्देश्य
साक्षर भारत अभियान का लक्ष्य उन प्रौढ़ नागरिकों को बुनियादी शिक्षा से जोड़ना है, जो किसी कारणवश बचपन में स्कूल नहीं जा सके। इस परीक्षा में मुख्य रूप से तीन पहलुओं पर ध्यान दिया गया:
पठन: अक्षरों और शब्दों को पहचानने की क्षमता।
लेखन: अपना नाम, पता और सरल वाक्य लिखने का कौशल।
अंकगणित: सामान्य जोड़-घटाव और दैनिक जीवन के हिसाब-किताब की समझ।
अधिकारियों का उत्साहवर्धन
घरघोड़ा बीईओ और साक्षरता विभाग के नोडल अधिकारियों ने परीक्षा केंद्र का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बताया कि बुजुर्गों को स्वावलंबी बनाने और उन्हें ठगी से बचाने के लिए साक्षर करना अनिवार्य है। परीक्षा के दौरान बुजुर्गों की मदद के लिए प्रेरकों की टीम भी मौजूद रही।
एक बुजुर्ग परीक्षार्थी का अनुभव:
“हमें खुशी है कि अब हमें अंगूठा नहीं लगाना पड़ेगा। अब हम खुद अपना नाम लिख सकते हैं और बैंक के कागजों को समझ सकते हैं। पढ़ लिखकर बहुत अच्छा लग रहा है।”
प्रेरणादायक संदेश
बीईओ कार्यालय में आयोजित इस परीक्षा ने समाज को यह संदेश दिया है कि शिक्षा केवल डिग्री पाने का जरिया नहीं, बल्कि सम्मान के साथ जीने का एक आधार है। इन बुजुर्गों का उत्साह क्षेत्र के उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो उम्र का बहाना बनाकर सीखने से पीछे हट जाते हैं।









