रायगढ़. मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 17 सूत्रीय मांगों को लेकर जूनियर डॉक्टरों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। स्टाइपेंड में बढ़ोतरी, बॉन्ड पॉलिसी की अवधि कम करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर डॉक्टरों ने नियमित ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार शुरू कर दिया है। आंदोलन के कारण अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों और उनके परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश के अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में भी डॉक्टरों के आंदोलन का असर देखने को मिल रहा है।
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन की ओर से लंबे समय से 17 सूत्रीय मांगों को लेकर शासन के समक्ष ज्ञापन और पत्राचार किया जा रहा है। डॉक्टरों की प्रमुख मांगों में एमबीबीएस इंटर्न के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी, पीजी रेजिडेंट, बॉन्डेड जूनियर रेजिडेंट और सीनियर रेजिडेंट के वेतन-मानदेय में संशोधन तथा बॉन्ड पॉलिसी में बदलाव शामिल हैं।
डॉक्टरों के मुताबिक 19 अगस्त को स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के साथ चर्चा के बाद उस समय आंदोलन स्थगित किया गया था। डॉक्टरों का कहना है कि बातचीत के दौरान इंटर्न के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी का आश्वासन मिला था, लेकिन लंबे समय तक लिखित आदेश नहीं आने के कारण उन्हें दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। अगस्त में जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन ने 17 सूत्रीय मांगों को लेकर शासन को ज्ञापन भी सौंपा था।
इस बीच राज्य सरकार ने एमबीबीएस इंटर्न का मासिक स्टाइपेंड 15,900 से बढ़ाकर 25,000 करने का आदेश जारी किया है, जिसे 1 अक्टूबर से लागू किया जाना है। हालांकि जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि केवल इंटर्न स्टाइपेंड में संशोधन से उनकी 17 सूत्रीय मांगें पूरी नहीं होतीं। अन्य श्रेणियों के डॉक्टरों के वेतन-मानदेय, बॉन्ड व्यवस्था और दूसरी मांगों पर भी लिखित आदेश की मांग की जा रही है।
जूनियर डॉक्टरों ने आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की चेतावनी दी है। नियमित ओपीडी के बहिष्कार के बाद मांगों का समाधान नहीं होने पर इमरजेंसी सेवाओं से भी दूरी बनाने की चेतावनी दी गई है। डॉक्टरों ने विरोध के दौरान मरीजों के लिए समानांतर ओपीडी चलाकर उपचार जारी रखने का प्रयास भी किया है।
अगर आंदोलन आगे बढ़ता है और आईपीडी तथा इमरजेंसी जैसी सेवाएं भी प्रभावित होती हैं, तो मेडिकल कॉलेज अस्पताल पर निर्भर हजारों मरीजों के सामने उपचार को लेकर बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है। खासकर दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों और उनके परिजनों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
डॉक्टरों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि लंबित मांगों पर स्पष्ट और लिखित निर्णय के लिए है। वहीं, अब नजर इस बात पर है कि सरकार बाकी मांगों पर कब तक ठोस आदेश जारी करती है।
स्टाइपेंड-बॉन्ड पॉलिसी को लेकर जूनियर डॉक्टरों का आंदोलन तेज, ओपीडी बहिष्कार से मरीजों की बढ़ी परेशानी



