January 20, 2026

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पीडीएस व्यवस्था में लापरवाही पर विक्रेता संचालन एजेंसी निलंबित, हितग्राहियों को वैकल्पिक दुकान से मिलेगा राशन प्रशासन व कंपनी के समन्वय से स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल मजबूती, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घरघोड़ा को 6 कंप्यूटर सेट भेंट धरमजयगढ़ हॉस्पिटल चौक पर लगा पोस्टर बन रहा दुर्घटनाओं की वजह, सोशल मीडिया पर हो रहा जमकर ट्रोल! पोस्टर का डायरेक्शन बदलने की हो रही मांग टीआरएन कंपनी से निकलने वाले फ्लाईएश वाहनों को ग्रामीणों ने रोका, नियमों के उल्लंघन का लगाया आरोप, ग्रामीणों और राहगीरों को हो रही भारी परेशानी डॉ. आरएल हॉस्पिटल में 6 माह में जन्मी नन्हीं बच्ची ने जीती ज़िंदगी की जंग, विशेषज्ञ डॉक्टरों की तत्परता और आधुनिक इलाज से बची 650 ग्राम की मासूम जान रेल यात्री ध्यान दें…23 से 25 जनवरी तक 6 मेमू पैसेंजर रद्द.. जानें कौन-कौन से रूट होंगे प्रभावित
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डॉ. आरएल हॉस्पिटल में 6 माह में जन्मी नन्हीं बच्ची ने जीती ज़िंदगी की जंग, विशेषज्ञ डॉक्टरों की तत्परता और आधुनिक इलाज से बची 650 ग्राम की मासूम जान

रायगढ़। शहर के गौशाला पारा स्थित डॉ. आरएल हॉस्पिटल में समय से पहले जन्मी एक नन्हीं बच्ची ने ज़िंदगी और मौत के बीच जंग जीत ली है। महज़ 6 माह की गर्भावस्था में जन्मी यह बच्ची मात्र 650 ग्राम वज़न की थी और उसकी हालत बेहद नाज़ुक थी। लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों की सतर्कता, आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था और सतत निगरानी के चलते आज बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है।
डॉ. आरएल हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि बच्ची का जन्म 25 अक्टूबर 2025 को सुबह 6:30 बजे हुआ था। जन्म के समय वह अपनी मां के गर्भ में मात्र 6 माह की थी और उसका वज़न केवल 650 ग्राम था। समय से पहले जन्म होने के कारण बच्ची के फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं हो पाए थे, जिससे उसे सांस लेने में गंभीर परेशानी होने लगी। डॉक्टरों ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए बिना एक पल गंवाए बच्ची को सर्फेक्टेंट इंजेक्शन दिया, जो नवजात शिशुओं के फेफड़ों को कार्य करने में मदद करता है। इससे बच्ची की सांस लेने की प्रक्रिया में सुधार हुआ।

वेंटीलेटर से लेकर मां के दूध तक—हर स्तर पर सतत निगरानी
जन्म के तीसरे दिन से बच्ची को आहारनली के माध्यम से मां का दूध थोड़ी मात्रा में देना शुरू किया गया। आठवें दिन बच्ची को सांस रुक-रुक कर चलने की समस्या (एपनिया) होने लगी, जिसके कारण उसे वेंटीलेटर पर रखा गया। डॉक्टरों की सतत निगरानी और उपचार से स्थिति में सुधार हुआ और 10 दिन बाद वेंटीलेटर हटा दिया गया।
इसके बाद बच्ची के वज़न को बढ़ाने के लिए सभी आवश्यक दवाइयां शुरू की गईं। दूध की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाई गई। दो माह के भीतर बच्ची का वज़न बढ़कर डेढ़ किलो हो गया और अब वह पूरी तरह स्वस्थ है।

विशेषज्ञ टीम की भूमिका सराहनीय
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. दिव्येश शर्मा की देखरेख में बच्ची के स्वास्थ्य में लगातार सुधार हुआ। डॉक्टरों की टीम ने दिन-रात निगरानी रखते हुए हर स्थिति पर तुरंत निर्णय लिया, जिससे बच्ची को नया जीवन मिल सका।
उन्होंने यह भी बताया कि डॉ. आरएल हॉस्पिटल में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त 10 बेड का एनआईसीयू और कुल 125 बेड की व्यवस्था उपलब्ध है, जहां गंभीर नवजातों के इलाज की संपूर्ण सुविधा मौजूद है।

परिजनों ने जताया आभार
बच्ची के परिजनों ने डॉक्टरों और हॉस्पिटल स्टाफ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी तत्परता और समर्पण की वजह से आज उनकी बच्ची सुरक्षित है।
यह मामला न केवल चिकित्सा क्षेत्र की सफलता की मिसाल है, बल्कि यह भी साबित करता है कि सही समय पर सही इलाज से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।

Sailaab News
Author: Sailaab News

Owner name : ajay kumar khatri

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