रायगढ़ । पूरी जगन्नाथ मंदिर के मान्यता अनुरूप आज रायगढ़ पूर्वांचल के ग्राम महापल्ली स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा जी के विग्रह को 108 कलश जल से स्नान कराया गया। यह कार्य मंदिर पूजक चन्द्रकान्त दास, श्रीकांत दास तथा उनके अनुयायियों के द्वारा विधि पूर्वक पूजन अर्चन के साथ संपन्न किया गया। उपस्थित सभी भक्तों ने भी स्नान कराया।
मंदिर पूजक चंद्रकांत दास ने बताया कि पुरी के जगन्नाथ मंदिर की मान्यता के अनुसार, हर साल ज्येष्ठ पूर्णिमा पर भगवान को 108 कलशों के पवित्र जल से स्नान कराया जाता है। अत्यधिक स्नान के कारण भगवान को बुखार हो जाता है और वे 15 दिनों तक एकांत में विश्राम करते हैं। इस दौरान भक्त उन्हें जड़ी-बूटियों का काढ़ा और फलों का भोग लगाते हैं।
भगवान जगन्नाथ के बीमार पड़ने के पीछे दो प्रमुख पौराणिक कारण बताए जाते हैं:1. भक्तों के प्रति प्रेम (स्नान यात्रा का प्रभाव):ज्येष्ठ पूर्णिमा पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र जी और सुभद्रा जी को बहुत सारे जल से स्नान कराया जाता है।भक्तों का मानना है कि इस जल के अत्यधिक वेग और ठंडक के कारण स्वयं ईश्वर को मानव रूप में बुखार (ज्वर) आ जाता है।
2. भक्त का कष्ट स्वयं ले लेना (माधव दास की कथा):एक मान्यता के अनुसार, माधव दास नाम के एक बहुत बड़े भक्त थे। एक बार वे बहुत बीमार पड़ गए और ठीक नहीं हो रहे थे।भगवान जगन्नाथ अपने इस भक्त के कष्ट को दूर करने के लिए उनकी बीमारी स्वयं अपने ऊपर ले लेते हैं।तभी से हर साल ठीक रथ यात्रा से पहले भगवान 15 दिनों के लिए बीमार पड़ जाते हैं।
बीमारी के 15 दिन क्या होता है?इन 15 दिनों के समय को अनवसर (Anasara) कहा जाता है।इस दौरान मंदिर के कपाट आम जनता के लिए बंद रहते हैं।भगवान को एक विशेष कक्ष (रत्न वेदी) में रखकर आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों (दशमूल) और फलों का लेप लगाया जाता है।जब भगवान पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं, तब प्रसिद्ध रथ यात्रा निकाली जाती है।











