रायगढ़। जंगल में अपनी मां के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने वाला एक नन्हा हाथी अचानक अपनों से बिछड़ गया। उम्र महज एक साल और सामने अनजान रास्ते। बीती रात खेत के कीचड़ में फंसने के बाद यह मासूम शावक 40 हाथियों के अपने दल से अलग हो गया। अब उसकी मां से दोबारा मिलन कराने के लिए वन विभाग और हाथी मित्र दल की टीम जुटी हुई है। छाल रेंज के रीलो गांव में नन्हे शावक को उसके परिवार से मिलाने की यह कोशिश हर किसी का ध्यान खींच रही है।
मिली जानकारी के अनुसार, धरमजयगढ़ वन मंडल के छाल रेंज अंतर्गत रीलो गांव के आसपास बीती रात करीब 40 हाथियों का दल विचरण कर रहा था। रात लगभग 9 बजे हाथियों का यह दल एक खेत से गुजर रहा था। इसी दौरान करीब एक साल का शावक खेत में मौजूद कीचड़ में फंस गया और अपने दल से बिछड़ गया। हाथियों का दल आगे बढ़ गया, लेकिन नन्हा शावक वहीं रह गया। मौके पर मौजूद लोगों ने इसकी सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दी। इसके बाद से ही वन विभाग और हाथी मित्र दल की टीम उसे सुरक्षित तरीके से उसके परिवार तक पहुंचाने के प्रयास में जुटी है। बताया जा रहा है कि शावक से बिछड़ने के बाद हाथियों का दल करीब तीन किलोमीटर दूर पहुंच चुका है। ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती शावक को सुरक्षित रखते हुए उसकी मां और दूसरे हाथियों तक पहुंचाना है। इसके लिए वन विभाग की टीम लगातार प्रयास कर रही है। हाथियों की लोकेशन का पता लगाने और उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरे की मदद भी ली जा रही है।
रेस्क्यू अभियान के दौरान शावक को उसके दल से मिलाने की हर संभव कोशिश की जा रही है। वन विभाग की प्राथमिकता शावक को सुरक्षित रखते हुए उसे उसके प्राकृतिक परिवार तक पहुंचाना है। रायगढ़ जिले के जंगलों में हाथियों और उनके शावकों से जुड़ी ऐसी घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। पिछले महीने बोरो रेंज के चाल्हा गांव में करीब दो महीने का एक हाथी शावक भैंसों के झुंड के साथ गांव पहुंच गया था। वह भी अपने हाथी दल से बिछड़ गया था। उस शावक को वापस उसके दल से मिलाने के लिए काफी प्रयास किए गए, लेकिन दल ने उसे स्वीकार नहीं किया। आखिरकार नन्हे शावक को सरगुजा जिले के रमकोला स्थित हाथी रेस्क्यू सेंटर भेजना पड़ा।
अब सबकी नजरें मां और शावक के मिलन पर
चाल्हा की घटना के बाद रीलो गांव में बिछड़े इस नन्हे शावक को लेकर भी चिंता बनी हुई है। एक ओर वन विभाग और हाथी मित्र दल उसे उसके परिवार तक पहुंचाने में जुटे हैं, तो दूसरी ओर इस अभियान की सफलता के लिए जरूरी है कि शावक की सुरक्षा के साथ हाथियों के दल की गतिविधियों पर भी लगातार नजर रखी जाए।
वन विभाग का रेस्क्यू अभियान जारी
जंगल में मां से बिछड़े इस मासूम के लिए अब सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि जल्द ही उसे अपनी मां और अपने झुंड का साथ फिर से मिल जाए। फिलहाल, वन विभाग का रेस्क्यू अभियान जारी है और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नन्हे शावक का अपने परिवार से मिलन हो पाता है या नहीं।









