August 4, 2026

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जिला अस्पताल पहुची प्रसूता के जच्चा बच्चा की मौत, परिजनों ने अस्पताल प्रबंधक पर लापरवाही का लगाया आरोप

गौरेला पेंड्रा मरवाही। जीपीएम जिले में प्रसव के लिए जिला अस्पताल पहुची प्रसूता के जच्चा बच्चा की मौत होने का मामला सामने आया है । जच्चा बच्चा की मौत के बाद नाराज परिजनों ने अस्पताल प्रबंधक पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।।तो दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी की माने तो प्रसूता के परिजनों के द्वारा लापरवाही और देरी के कारण जच्चा बच्चा की मौत हुई है।

दरअसल पूरा मामला गौरेला विकाशखण्ड के जोगीसार गांव के तरैयापारा में प्रसूता अनिता बाई (30) और उसके नवजात की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। परिजनों ने जिला अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते कार्रवाई की मांग की है। दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग ने इसे समय पर अस्पताल में भर्ती न होने से जुड़ी जागरूकता की कमी करार दिया है।जानकारी के अनुसार अनिता बाई चौथी बार गर्भवती थी और गांव की मितानिन की निगरानी में उसकी प्रसव पूर्व देखभाल जारी थी। 29 नवंबर को जब प्रसव पीड़ा बढ़ी, तो सुबह 10 बजे मितानिन की मदद से एंबुलेंस द्वारा उसे जिला अस्पताल लाया गया। परिजनों का आरोप है कि सुबह से शाम तक ऑपरेशन नहीं किया गया, न ही समय पर उचित उपचार मिला, जिससे प्रसूता की स्थिति लगातार बिगड़ती गई। शाम तक हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे बिलासपुर सिम्स रेफर कर दिया।
बताया जाता है कि सिम्स ले जाते समय ही रास्ते में जच्चा और बच्चा दोनों की मौत हो गई, जिसके बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। उनका कहना है कि यदि समय पर रेफर किया जाता या फिर ऑपरेशन किया जाता और डॉक्टर सक्रिय रहते, तो दोनों की जान बच सकती थी। वहीं मृतिका के पति शंकर यादव ने आरोप लगाया कि अस्पताल में दवा और दूसरे खर्चों के नाम पर पैसा मांगने के साथ-साथ नर्स को 4,000 रुपये भी देने पड़े, फिर भी उपचार में लापरवाही बरती गई।
वही मामले में गांव की मितानिन क्रांति पैकरा ने भी अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रसूता को भर्ती तो कर लिया गया, लेकिन पूरे दिन उचित देखभाल नहीं की गई, जिसके कारण स्थिति बिगड़ती चली गई।
इधर जिला स्वास्थ्य अधिकारी का कहना है कि प्रसूता को तीन दिन पहले ही अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी गई थी, लेकिन परिजनों ने उसे भर्ती नहीं कराया। अधिकारी ने बताया कि अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने पूर्ण प्रयास किया, पर हालत गंभीर होने पर रेफर करना पड़ा। विभाग ने इसे जनजागरूकता की कमी बताते हुए कहा है कि समय पर अस्पताल पहुंचने से ऐसी परिस्थितियों से बचा जा सकता है।
इस दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को सदमे में डाल दिया है। अनिता बाई के तीन छोटे बच्चे अब बेसहारा हो गए हैं। परिजनों के अनुसार मासूम बच्चे बार-बार अपनी मां के बारे में पूछते हैं उन्हें अब भी लगता है कि उनकी मां इलाज कराने अस्पताल गई है, जबकि उन्हें यह नहीं पता कि उनकी मां अब कभी वापस नहीं आ पाएगी। घटना के बाद क्षेत्र में गहरा रोष है। ग्रामीण और परिजन अस्पताल प्रबंधन पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

Sailaab News
Author: Sailaab News

Owner name : ajay kumar khatri

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