रायगढ़। बहुचर्चित गढ़ गोलीकांड मामले में घरघोड़ा न्यायालय ने अहम फैसला सुनाते हुए महिला की हत्या के दोषी पाए गए सगे भाई-बहन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक शर्मा की अदालत ने गोपाल यादव और लक्ष्मी यादव को दुरपती यादव की हत्या और आपराधिक षड्यंत्र रचने का दोषी मानते हुए उम्रकैद के साथ अर्थदंड से दंडित किया।
अभियोजन के अनुसार, घटना लैलूंगा थाना क्षेत्र के ग्राम दियागढ़ में हुई थी। रात के सन्नाटे में घर के बाहर खाट पर सो रही दुरपती यादव को गोली मार दी गई थी। गोली लगते ही उनकी मौके पर मौत हो गई थी। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी और मामला लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहा।
मृतका के पुत्र हरिराम यादव ने पुलिस को बताया था कि घटना वाली रात परिवार के सदस्य घर के भीतर सो रहे थे, जबकि उनकी मां बाहर सो रही थीं। देर रात कुत्ते के भौंकने की आवाज सुनकर जब वह और उसका भाई बाहर निकले तो गोली चलने की आवाज आई। बाहर पहुंचने पर उन्होंने गोपाल यादव और एक नाबालिग को मोटरसाइकिल से भागते देखा। वहीं उनकी मां खून से लथपथ पड़ी थीं।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि दोनों परिवारों के बीच वर्षों से गहरा विवाद चल रहा था। हरिराम यादव द्वारा गोपाल यादव की रिश्तेदार पदमा से प्रेम विवाह किए जाने के बाद रिश्तों में कड़वाहट बढ़ गई थी। इसके अलावा पुराने आपराधिक मामलों और पारिवारिक विवादों ने दुश्मनी को और गहरा कर दिया था। जांच में यह भी सामने आया कि लक्ष्मी यादव और दुरपती यादव के बीच अक्सर विवाद होता था और कई बार धमकी देने की बातें भी सामने आई थीं।
पुलिस विवेचना में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि हत्या की योजना पहले से बनाई गई थी। मामले में शामिल विधि से संघर्षरत बालक को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसमें गोपाल यादव, लक्ष्मी यादव और बालक द्वारा मिलकर हत्या की साजिश रचने की जानकारी मिली। वारदात में इस्तेमाल की गई भरमार बंदूक को घटना के बाद तोड़कर छिपा दिया गया था। पुलिस ने लक्ष्मी यादव के कब्जे से बंदूक के हिस्से और बालक से रिवॉल्वर बरामद किया, जबकि मुख्य आरोपी गोपाल यादव को ओडिशा से गिरफ्तार किया गया।
सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर न्यायालय ने दोनों आरोपियों को हत्या, आपराधिक षड्यंत्र, साक्ष्य मिटाने और अवैध हथियार रखने का दोषी करार दिया। अदालत ने हत्या और षड्यंत्र के अपराध में आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जबकि साक्ष्य छिपाने और हथियार संबंधी अपराधों के लिए पांच-पांच वर्ष के सश्रम कारावास का दंड भी दिया।
इसके अलावा गोपाल यादव पर 5 हजार रुपये और लक्ष्मी यादव पर 4 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। न्यायालय ने मृतका के आश्रितों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रायगढ़ के माध्यम से एक लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि प्रदान किए जाने की अनुशंसा भी की है।
इस चर्चित मामले में शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर ने प्रभावी पैरवी की, जिसके आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषसिद्ध कर सजा सुनाई। वर्षों पुराने विवाद से जन्मी दुश्मनी का यह मामला आखिरकार अदालत के फैसले के साथ अपने निर्णायक पड़ाव पर पहुंच गया।









