रायपुर/नई दिल्ली। खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने डेयरी एनालॉग (Analogue Dairy Products) विशेषकर एनालॉग पनीर के संबंध में अंतरिम जोखिम प्रबंधन उपाय (Provisional Risk Management Measure) जारी किए हैं। आदेश में कहा गया है कि ऐसे उत्पादों की बिक्री और उपयोग के दौरान उपभोक्ताओं को स्पष्ट जानकारी देना अनिवार्य होगा, ताकि उन्हें वास्तविक डेयरी उत्पाद और एनालॉग उत्पाद के बीच अंतर समझने में कोई भ्रम न हो।
एफएसएसएआई के अनुसार, एनालॉग पनीर ऐसा उत्पाद है जो दिखने, बनावट और उपयोग में पारंपरिक पनीर जैसा हो सकता है, लेकिन उसमें दूध के घटकों का आंशिक या पूर्ण प्रतिस्थापन गैर-डेयरी सामग्री से किया जाता है। ऐसे उत्पादों को यदि स्पष्ट रूप से चिह्नित नहीं किया गया तो उपभोक्ता धोखे का शिकार हो सकते हैं।
आदेश में कहा गया है कि बिना पैकेज वाले खाद्य प्रतिष्ठानों, होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों तथा कैटरिंग सेवाओं में यदि एनालॉग पनीर का उपयोग किया जा रहा है, तो इसकी जानकारी उपभोक्ताओं को स्पष्ट रूप से दी जानी चाहिए। किसी भी प्रकार से उत्पाद को सामान्य पनीर के रूप में प्रस्तुत करना भ्रामक माना जा सकता है।
एफएसएसएआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि उपभोक्ताओं को सही विकल्प चुनने का अधिकार है। इसलिए एनालॉग उत्पादों की पहचान, लेबलिंग और प्रस्तुति में पारदर्शिता सुनिश्चित करना खाद्य व्यवसाय संचालकों की जिम्मेदारी होगी।
प्राधिकरण ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की विभिन्न धाराओं का हवाला देते हुए कहा है कि भ्रामक प्रस्तुति, गलत लेबलिंग अथवा उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। राज्यों और संबंधित अधिकारियों को भी इस संबंध में आवश्यक निगरानी एवं प्रवर्तन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
एफएसएसएआई का मानना है कि इन उपायों से उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा होगी तथा खाद्य उत्पादों के संबंध में पारदर्शिता और जागरूकता बढ़ेगी।










