सुदूर वनांचल में शिक्षा के नवाचारों का सजीव उदाहरण बना शासकीय प्राथमिक शाला लामीखार
रायगढ़। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी घरघोड़ा एवं धरमजयगढ़ विकासखण्ड के दौरे पर थे। इसी दौरान उन्होंने धरमजयगढ़ तहसील के अंतिम छोर पर स्थित सुदूर वनांचल क्षेत्र के ग्राम पंचायत देउरमार के आश्रित ग्राम लामीखार में संचालित शासकीय प्राथमिक शाला का निरीक्षण किया और स्कूल में बच्चों के शारीरिक,मानसिक और बौद्धिक विकास के लिए किए जा रहे नवाचार प्रयासों का मुआयना किया और बच्चों के सीधे रुबरु हुए। उन्होंने विद्यालय में संचालित शैक्षणिक गतिविधियों, नवाचारों तथा समग्र शिक्षण वातावरण का अवलोकन कर विद्यालय के प्रयासों की सराहना की।
कलेक्टर ने कक्षा पहली से पांचवीं तक के विद्यार्थियों से सीधे संवाद किया और उनकी शैक्षणिक समझ, भाषा ज्ञान एवं आत्मविश्वास का आकलन किया। विद्यार्थियों द्वारा हिंदी एवं अंग्रेजी भाषा में सहजता से दिए गए उत्तरों से कलेक्टर अत्यंत प्रसन्न दिखाई दिए। उन्होंने बच्चों की अभिव्यक्ति क्षमता, अनुशासन एवं सीखने की रुचि की प्रशंसा करते हुए इसे शिक्षकों के सतत मार्गदर्शन का परिणाम बताया। कलेक्टर ने विद्यालय परिसर में निर्मित पूर्णतः शिक्षण-अनुकूल प्रिंट-रिच वातावरण का अवलोकन किया। कबाड़ से जुगाड़ की अवधारणा पर आधारित पवन चक्की, सौर ऊर्जा मॉडल, यातायात संकेत, माइलस्टोन, भारत एवं छत्तीसगढ़ के मानचित्र सहित विविध शिक्षण सामग्री को उन्होंने अनुभव आधारित शिक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। कलेक्टर ने कहा कि इस प्रकार के नवाचार बच्चों में जिज्ञासा, तार्किक सोच एवं व्यवहारिक ज्ञान को विकसित करते हैं।
कलेक्टर ने मुस्कान पुस्तकालय के अंतर्गत संचालित बंद पुस्तकालय, खुला पुस्तकालय एवं चर्चा-पत्र पुस्तकालय का निरीक्षण किया, जहां लगभग 1500 पुस्तकों का संचालन एवं रख-रखाव स्वयं विद्यार्थी करते हैं। उन्होंने बच्चों के जन्मदिवस पर आयोजित “एक दिन का गुरुजी” एवं “आज का फूल” जैसी गतिविधियों को बच्चों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता एवं जिम्मेदारी की भावना विकसित करने वाला नवाचार बताया। निरीक्षण उपरांत कलेक्टर ने शासकीय प्राथमिक शाला लामीखार को जिले के अन्य विद्यालयों के लिए अनुकरणीय मॉडल बताया। उन्होंने निर्देश दिए कि विद्यालय में किए जा रहे नवाचारों, शिक्षण पद्धतियों एवं सामुदायिक सहभागिता को निरंतर आगे बढ़ाया जाए तथा इन्हें अन्य शालाओं में भी अपनाने हेतु प्रेरित किया जाए।
किचन गार्डन और पर्यावरण शिक्षा की सराहना
कलेक्टर ने विद्यालय में विकसित किचन गार्डन, हर्बल गार्डन, मसाला बगान एवं गुलाब गार्डन का भी निरीक्षण किया। विद्यालय परिसर में लगाए गए लगभग 128 किस्मों के फलदार, फूलदार एवं औषधीय पौधों-जिनमें अंजीर, सेव, चंदन, नींबू, कटहल, चिकोतरा एवं मौसंबी शामिल हैं, को उन्होंने पर्यावरण शिक्षा एवं व्यवहारिक अधिगम का सशक्त माध्यम बताया। कलेक्टर ने इस कार्य में विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं समुदाय की सहभागिता को भी सराहा।
विद्यार्थियों की उपलब्धियों पर जताई प्रसन्नता
लगभग 314 की आबादी वाले इस आदिवासी बहुल गांव में संचालित विद्यालय में वर्तमान में कुल 46 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनमें 30 बालक एवं 16 बालिकाएं शामिल हैं। वर्ष 2025 में विद्यालय के 08 विद्यार्थियों का विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों में चयन हुआ है। इस उपलब्धि पर कलेक्टर ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह विद्यालय में किए जा रहे गुणवत्तापूर्ण शिक्षण एवं नवाचारों का प्रत्यक्ष परिणाम है, जो पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणादायी है।










