रायगढ़। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में आयोजित विधानसभा घेराव कार्यक्रम ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। यह आंदोलन केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि कांग्रेस की संगठित ताकत और जनसमर्थन का बड़ा प्रदर्शन बनकर उभरा। रायगढ़ जिले से जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण के अध्यक्ष नगेन्द्र नेगी के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ता, विभिन्न ब्लॉकों और ग्राम पंचायतों से एकजुट होकर राजधानी पहुंचे और अपने राजनीतिक संकल्प का परिचय दिया।
सुबह से ही रायपुर की सड़कों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। हाथों में झंडे-बैनर और नारों की गूंज के बीच पूरे शहर का माहौल पूरी तरह राजनीतिक हो गया। “युवा विरोधी सरकार हटाओ”, “नशा मुक्त छत्तीसगढ़ बनाओ”, “जनता के हक दो” और “भ्रष्टाचार बंद करो” जैसे तीखे नारों से राजधानी गूंज उठी। प्रदर्शनकारियों में युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिली, जो इस आंदोलन की व्यापकता को दर्शाती है।
इस विशाल घेराव कार्यक्रम में कांग्रेस के कई राष्ट्रीय और प्रदेश स्तरीय दिग्गज नेताओं की उपस्थिति ने इसे और अधिक प्रभावशाली बना दिया। मंच पर सचिन पायलट, भूपेश बघेल, दीपक बैज, टी एस सिंहदेव और चरणदास महंत सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने मंच साझा किया। नेताओं ने अपने संबोधन में भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला और आरोप लगाया कि राज्य में बेरोजगारी चरम पर है, महंगाई लगातार बढ़ रही है और नशे का कारोबार युवाओं को बर्बादी की ओर धकेल रहा है।
नेताओं ने कहा कि सरकार जनता की बुनियादी समस्याओं से पूरी तरह कट चुकी है और केवल प्रचार-प्रसार में व्यस्त है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही जनता की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो कांग्रेस सड़कों पर और भी उग्र आंदोलन करने को बाध्य होगी। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि जनहित और युवाओं के भविष्य को बचाने की लड़ाई है।
रायगढ़ जिला कांग्रेस ग्रामीण के अध्यक्ष नगेन्द्र नेगी ने अपने संबोधन में कार्यकर्ताओं के उत्साह और एकजुटता की सराहना करते हुए कहा कि “यह भीड़ नहीं, बल्कि परिवर्तन की चेतना है।” उन्होंने कहा कि रायगढ़ की जनता अब अन्याय और उपेक्षा को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। यह जनसमर्थन आने वाले समय में सत्ता परिवर्तन की मजबूत नींव रखेगा।
इस दौरान प्रशासन और पुलिस भी पूरी तरह मुस्तैद नजर आए। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था की स्थिति न बने। बावजूद इसके, प्रदर्शन पूरी तरह जोश और अनुशासन के साथ संपन्न हुआ, जो कांग्रेस संगठन की मजबूत पकड़ को दर्शाता है।
कुल मिलाकर, रायपुर में हुआ यह विधानसभा घेराव कार्यक्रम छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। यह न केवल कांग्रेस के लिए शक्ति प्रदर्शन रहा, बल्कि भाजपा सरकार के खिलाफ एक स्पष्ट और सशक्त राजनीतिक संदेश भी बनकर उभरा है, जिससे आने वाले दिनों में प्रदेश की सियासत और अधिक गर्माने के संकेत मिल रहे हैं।









