छत्तीसगढ़ के वन्यजीव प्रेमी एवं हाथी शुभचिंतक वैभव जगने ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि हाथी प्रभावित क्षेत्रों को प्लास्टिक मुक्त घोषित कर वहां प्लास्टिक के उपयोग पर प्रभावी नियंत्रण किया जाए।
वैभव जगने ने कहा कि वर्ष 2022 में उत्तराखंड में किए गए एक अध्ययन के दौरान हाथियों के गोबर में प्लास्टिक के अंश पाए गए थे, जो वन्यजीवों और पर्यावरण के लिए गंभीर चिंता का विषय है। जंगलों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में फेंका गया प्लास्टिक कचरा हाथियों सहित अन्य वन्यजीवों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
उन्होंने कहा कि हाथी भोजन की तलाश में मानव बस्तियों और कचरा स्थलों तक पहुंच जाते हैं, जहां अनजाने में वे प्लास्टिक और अन्य हानिकारक पदार्थ निगल लेते हैं। इससे उनके पाचन तंत्र पर बुरा प्रभाव पड़ता है तथा कई बार उनकी जान को भी खतरा हो सकता है।
वैभव जगने ने छत्तीसगढ़ सरकार, वन विभाग एवं स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि हाथी प्रभावित क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन को सुदृढ़ किया जाए, जनजागरूकता अभियान चलाए जाएं तथा इन क्षेत्रों को चरणबद्ध तरीके से प्लास्टिक मुक्त बनाया जाए, ताकि प्रदेश में भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो और हाथियों सहित सभी वन्यजीवों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।











