रायगढ़। किसान मजदूरों का खास तिहार हरेली में अब रौनकता नहीं रह गई । इंटरनेट और मोबाइल की इस युग ने ग्रामीण संस्कृति को भी खोखला कर दिया है। खेती किसानी तो हो रही है लेकिन किसी के पास नागर, हल नहीं है, बैल और भैंसा भी नहीं है। आधुनिक खेती के इस दौर में बैल गाड़ी ,बेलन की प्रचलन भी खतम हो गई है। आज हरेली तिहार मनाई गई लेकिन वो उत्साह नहीं देखी गई ,हां परंपरा को बनाए रखने के लिए गांव के बैगा के पास सभी ने पूजा सामग्री भेज दी और कोई भी दिल चस्पी नहीं दिखाई कि देवलास में बैगा पूजा अर्चना कर रहा गांव की खुशहाली के लिए तो हम भी शामिल हो। बैगा ने पूजा अर्चना किया और सब के घरों में प्रसाद भिजवा कर अपनी अड़िहा और पियाई ले ली । अब तो गांव का लोहार भी कील ठोकने नहीं आ रहा, इसका कारण भी यही हो सकता है आखिर ठोके कील तो कहा सब तो पक्के मकान हो गया चौखट भी लोहे की । पहले लोहार लकड़ी के चौखट में कील ठोक कर मंत्र फूंक कर टोटका करता था ताकि मनहूस शक्तियां घर में हावी न हो बदले में उसे अड़िहा और पेशगी दी जाती थी। गांव का नरीहा, ग्वाला जो गौ चराता था वह भी गांव में नही है,अब तो कोई गौ पालन नहीं कर रहा ऐसे में ग्वाले की कमी भी हरेली तिहार की रौनकता को फीका कर दिया। गेड़ी की परंपरा भी अब नहीं रह गई सब अब मोबाइल में मस्त है। कुल मिलाकर महापल्ली में गांव के हनुमान मंदिर में पूजारी चंद्रकांत दास ने पूजा अर्चना किया, सुंदर कांड का पाठ किया और गांव के खुशहाली,अच्छी फसल के कामना की वही बैगा तेजराम राठिया ने दोनों देवालयों में जाकर पूजा अर्चना किया। ग्रामीण परम्परा का निर्वहन करते हुए ग्रामीणों ने श्रद्धा पूर्वक पूजा सामग्री दी। ग्राम देवता ठाकुर देव, पाठ माउली, घाट माउली, गौतिन गौंटिया, रक्सा और भात परसी जैसे सभी देवा देवियों को विधि विधान से पूजा अर्चना किया।











