October 8, 2026

ऐप डाउनलोड करें

मोबाइल टावर से बैटरी चोरी करने वाला फरार आरोपी गिरफ्तार, तमनार पुलिस ने चोरी की 2 बैटरियां की बरामद कर भेजा जेल परम पूज्य गुरुदेव धर्माचार्य श्री सोमेश परसाई जी के 7-10-2026 प्राकट्योत्सव पर हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई 🌺 15 साल की उम्र में थामा मिट्टी का हुनर, 41 साल बाद भी जारी है राम प्रसाद का सफर रिटायर्ड शिक्षक से 47 लाख रुपये की धोखाधड़ी, कोतरारोड़ पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार, करीब 6 वर्षों तक विश्वास का फायदा उठाकर आरोपी ने खाते से किया ऑनलाइन ट्रांजेक्शन पहले पिता, फिर भाई और अब मां का नेत्रदान, मंगवानी परिवार ने पेश की मानवता की मिसाल खरसिया में हेल्पिंग हैंड्स क्लब फाउंडेशन एवं रायगढ़ पुलिस के संयुक्त तत्वाधान में यातायात एवं साइबर जागरूकता अभियान का शानदार आगाज
मोबाइल टावर से बैटरी चोरी करने वाला फरार आरोपी गिरफ्तार, तमनार पुलिस ने चोरी की 2 बैटरियां की बरामद कर भेजा जेल परम पूज्य गुरुदेव धर्माचार्य श्री सोमेश परसाई जी के 7-10-2026 प्राकट्योत्सव पर हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई 🌺 15 साल की उम्र में थामा मिट्टी का हुनर, 41 साल बाद भी जारी है राम प्रसाद का सफर रिटायर्ड शिक्षक से 47 लाख रुपये की धोखाधड़ी, कोतरारोड़ पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार, करीब 6 वर्षों तक विश्वास का फायदा उठाकर आरोपी ने खाते से किया ऑनलाइन ट्रांजेक्शन पहले पिता, फिर भाई और अब मां का नेत्रदान, मंगवानी परिवार ने पेश की मानवता की मिसाल खरसिया में हेल्पिंग हैंड्स क्लब फाउंडेशन एवं रायगढ़ पुलिस के संयुक्त तत्वाधान में यातायात एवं साइबर जागरूकता अभियान का शानदार आगाज

15 साल की उम्र में थामा मिट्टी का हुनर, 41 साल बाद भी जारी है राम प्रसाद का सफर

 

खरसिया। उम्र 56 साल, लेकिन हाथों में आज भी वही हुनर और जुनून है, जो करीब 41 साल पहले एक किशोर के हाथों में दिखाई दिया था। खरसिया के ग्रामीण क्षेत्र सोडका निवासी राम प्रसाद डनसेना ने महज 15 वर्ष की उम्र में, कक्षा नौवीं में पढ़ाई के दौरान मिट्टी से मूर्तियां बनाना शुरू किया था। तब शायद उन्होंने भी नहीं सोचा होगा कि यही हुनर आगे चलकर उनकी पहचान बन जाएगा।

आज चार दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद राम प्रसाद डनसेना क्षेत्र के जाने-पहचाने मूर्तिकार बन चुके हैं। वे भगवान गणेश, मां दुर्गा, भगवान विश्वकर्मा, मां शाकंभरी, मां काली और राधा-कृष्ण सहित विभिन्न देवी-देवताओं की प्रतिमाएं तैयार करते हैं।

उनके हाथों से तैयार प्रतिमाएं खरसिया और आसपास के कई क्षेत्रों में स्थापित होकर लोगों की आस्था का केंद्र बन चुकी हैं। डीबी पावर प्लांट में स्थापित भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा, उल्दा झरिया में राधा-कृष्ण की प्रतिमा और बसनाझर की प्रसिद्ध काली पूजा में स्थापित मां काली की प्रतिमा उनकी कला की पहचान बन चुकी हैं।

मिट्टी में सिर्फ प्रतिमा नहीं, वर्षों का अनुभव गढ़ते हैं

राम प्रसाद के लिए मिट्टी केवल एक सामग्री नहीं, बल्कि उनकी कला का आधार है। मिट्टी को तैयार करने, उसका सही मिश्रण बनाने और धीरे-धीरे उसे मनचाहा आकार देने की प्रक्रिया में वर्षों का अनुभव दिखाई देता है। एक प्रतिमा को अंतिम रूप देने तक कई चरणों से गुजरना पड़ता है और हर चरण में कलाकार की मेहनत और कल्पनाशीलता की जरूरत होती है।

खास बात यह है कि राम प्रसाद मुख्य रूप से मिट्टी की प्रतिमाएं तैयार करते हैं। प्राकृतिक सामग्री से मूर्ति निर्माण की यह परंपरा स्थानीय शिल्प और पारंपरिक कला को जीवित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्रतिमा में इस्तेमाल होने वाले रंग और अन्य सामग्री के पर्यावरणीय प्रभाव को ध्यान में रखना भी जरूरी है, लेकिन मिट्टी आधारित मूर्तिकला पारंपरिक शिल्प की एक महत्वपूर्ण कड़ी बनी हुई है।

बदलते दौर में भी नहीं छोड़ा अपना हुनर

आज जब मूर्ति निर्माण के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और अलग-अलग तरह की सामग्रियों का इस्तेमाल बढ़ रहा है, वहीं राम प्रसाद डनसेना चार दशक से अधिक समय से अपने पारंपरिक हुनर को आगे बढ़ा रहे हैं।

15 साल की उम्र में शुरू हुआ यह सफर आज 56 वर्ष की उम्र तक पहुंच चुका है। इन 41 वर्षों में उन्होंने न जाने कितनी प्रतिमाओं को आकार दिया होगा, लेकिन मिट्टी से जुड़ा उनका रिश्ता आज भी कायम है।

सोडका के राम प्रसाद डनसेना की कहानी उस हुनर की कहानी है, जो किताबों से नहीं बल्कि वर्षों के अभ्यास, मेहनत और अनुभव से सीखा जाता है। मिट्टी को आकार देते-देते उन्होंने न सिर्फ देवी-देवताओं की प्रतिमाएं बनाईं, बल्कि अपने गांव और क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान भी गढ़ ली।

Sailaab News
Author: Sailaab News

Owner name : ajay kumar khatri

और पढ़ें
10
Did you like our Portal?

Did you like our Portal?