रायगढ़ जिले के भूपदेवपुर में स्थित बिलासपुर गांव में एक ऐसी परंपरा आज भी जीवित है, जिसे सुनकर और देखकर लोग हैरान रह जाते हैं। यहां राठिया परिवार में नई दुल्हन को घर में प्रवेश करने से पहले जलते हुए अंगारों पर चलना पड़ता है। जिसे एक अग्नि परीक्षा की तरह देखा जाता है। हाल ही में बिलासपुर के जयप्रकाश राठिया का विवाह बाड़ादरहा गांव में संपन्न हुआ। बारात वापस लौटने के बाद इस अनोखी रस्म का आयोजन किया गया। परंपरा के अनुसार, दूल्हा और दुल्हन को घर के भीतर कदम रखने से पहले आंगन में बिछाए गए दहकते अंगारों पर सात फेरे लेने पड़े। इसे देखने के लिए पूरे गांव की भीड़ उमड़ पड़ी थी।
जयप्रकाश के पिता मेहत्तर राठिया ने बताया कि वधू के आगमन से पहले पूरा परिवार उपवास रखता है। रविवार रात से लेकर सोमवार सुबह 8 बजे तक, जब तक बहू घर नहीं पहुंच गई, परिवार के किसी भी सदस्य ने अन्न दूर, पानी की एक बूंद तक ग्रहण नहीं की। गांव पहुंचने पर पहले दूल्हा-दुल्हन का स्वागत किया गया, उन्हें नए वस्त्र और आभूषण भेंट किए गए और फिर शुरू हुई अग्नि परीक्षा की तैयारी। तो दूर,जैसे ही दूल्हा-दुल्हन मंडप के पास पहुंचे, पूरे माहौल में भक्ति और उत्साह का संचार हो गया। मंडप को चारों तरफ से कपड़ों से ढंक दिया गया। इस दौरान दूल्हे के पिता मेहत्तर राठिया पर कथित रूप से देवता का आह्वान हुआ। जिसके बाद उन्होंने चूल्हे से जलते हुए लाल अंगार लाकर मंडप के बीचों-बीच बिछा दिए और खुद उन दहकते अंगारों पर नाचने लगे। इसके तुरंत बाद, उन्हीं अंगारों पर दूल्हा और दुल्हन ने हाथ थामकर सात फेरे लिए। आश्चर्य की बात यह रही कि इतनी भीषण गर्मी और अंगारों के बावजूद किसी को कोई चोट नहीं आई।
गांव के युवक दामेश पटेल ने जानकारी दी कि बिलासपुर गांव में गंधेल गोत्र के केवल दो ही परिवार निवास करते हैं। यह परंपरा इन्हीं परिवारों में पिछले 100 से अधिक वर्षों से चली आ रही है। परिवार के बुजुर्ग भी यह नहीं बता पाते कि इसकी सटीक शुरुआत कब हुई, लेकिन पूर्वजों के प्रति अगाध श्रद्धा के कारण नई पीढ़ी भी इसे सहर्ष स्वीकार करती है। राठिया परिवार का मानना है कि अग्नि पर चलना केवल एक रस्म नहीं, बल्कि पवित्रता और सामर्थ्य का प्रतीक है। मान्यता है कि जो जोड़ा अंगारों पर चलकर घर में प्रवेश करता है, वह जीवन की बड़ी से बड़ी कठिनाइयों को मिलकर सहने की शक्ति प्राप्त कर लेता है।









