रायगढ़. सरकार लगातार उच्च शिक्षा को आधुनिक और मजबूत बनाने की बात कर रही है। नई शिक्षा नीति डिजिटल एजुकेशन और गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है और जिले में शिक्षण व्यवस्था की बदहाली की ओर ईशारा कर रही है।
खरसिया विकासखंड अंतर्गत आने वाला शासकीय नवीन महाविद्यालय चपले, जो शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय से संबद्ध है, आज भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में संचालित हो रहा है। हालत यह है कि पूरा कॉलेज केवल तीन कमरों में चलाया जा रहा है।
वर्ष 2021-22 में शुरू हुए इस महाविद्यालय को आज तक खुद का स्वतंत्र भवन नहीं मिल पाया है। फिलहाल कॉलेज की पढ़ाई स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल भवन के सहारे संचालित हो रही है।
पहले से वहां हिंदी और अंग्रेजी माध्यम की स्कूल कक्षाएं चलती हैं। ऐसे में कॉलेज को दोपहर 12 बजे से शाम 5ः30 बजे तक कक्षाएं लगानी पड़ रही हैं।
एक कमरा कार्यालय के लिए उपयोग हो रहा है, जबकि बाकी कमरों में छात्रों की पढ़ाई कराई जा रही है। सीमित जगह और संसाधनों के बीच पढ़ाई व्यवस्था प्रभावित होना स्वाभाविक है।
सेमेस्टर सिस्टम, इंटरनल परीक्षा, प्रोजेक्ट और नई शिक्षा नीति के दबाव के बीच छात्र बेहतर शिक्षा की उम्मीद लेकर कॉलेज पहुंचते हैं, लेकिन संसाधनों की कमी उनके भविष्य पर सवाल खड़े कर रही है।
जब पर्याप्त कक्ष, पुस्तकालय और शैक्षणिक सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं होंगी, तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे संभव होगी कृ यह सवाल अब स्थानीय लोगों और विद्यार्थियों के बीच चर्चा का विषय बन चुका है।
इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद अब तक न तो कॉलेज के लिए स्वतंत्र भवन की व्यवस्था हो पाई है और न ही कोई बड़ा समाधान सामने आया है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई, तो आने वाले शिक्षण सत्र में स्थिति और भी खराब हो सकती है। इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई और भविष्य पर पड़ेगा।









