रायगढ़. क्षेत्र में अवैध रेत खनन का कारोबार मानो कानून और प्रशासन को खुली चुनौती देता नजर आ रहा है। प्रतिबंधों, नियमों और कार्रवाई के दावों के बावजूद रेत माफिया बेखौफ होकर नदी की छाती चीरने में जुटे हुए हैं। ताजा मामला धरमजयगढ़ के मांड नदी स्थित डोंगाघाट से सामने आया है, जहां दिनदहाड़े अवैध रूप से रेत उत्खनन और परिवहन किए जाने की सूचना ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, डोंगाघाट के नीचे नदी क्षेत्र में एक ट्रैक्टर में अवैध रेत लोड करने का कार्य ट्रेक्टर फिटिंग लोडर वाहन के माध्यम से किया जा रहा था। बताया जाता है कि तस्कर बेधड़क तरीके से नदी से रेत निकालकर उसका परिवहन कर रहे थे। मामले की सूचना तत्काल धरमजयगढ़ तहसीलदार को दी गई, जिसके बाद उन्होंने गंभीरता दिखाते हुए पटवारी विकास वर्मा,हल्का नंबर 56 में मौके पर जांच हेतु रवाना किया।
सूत्रों के मुताबिक, जैसे ही राजस्व अमला घटनास्थल पर पहुंचा और पंचनामा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की, उसी दौरान कथित तस्कर मुरली यादव ट्रैक्टर-लोडर सहित नदी के रास्ते से फरार हो गया। यह घटना न केवल प्रशासनिक कार्रवाई को धता बताने वाली है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अवैध खनन में संलिप्त तत्व कितने संगठित और निर्भीक हो चुके हैं। हालांकि पटवारी द्वारा मौके की स्थिति का पंचनामा तैयार कर संबंधित विभाग को सौंप दिया गया है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह मामला भी सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाएगा, या फिर जिम्मेदार विभाग तस्करों के खिलाफ ठोस और प्रभावी कार्रवाई करेगा?
वहीं क्षेत्रवासियों का कहना है कि मांड नदी में लंबे समय से अवैध रेत उत्खनन का खेल जारी है। दिन हो या रात, नदी घाटों पर खनन और परिवहन का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। इसके कारण न केवल शासन को राजस्व की हानि हो रही है, बल्कि नदी के प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरण पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
अब निगाहें प्रशासन और खनिज विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि इस मामले में भी कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो रेत माफियाओं के हौसले और बुलंद होना तय माना जा रहा है। अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई के दावों की वास्तविक परीक्षा अब इसी मामले से होने वाली है।











