रायगढ़। रायगढ़ पूर्वांचल के सुसंस्कृत ग्राम महापल्ली का रिटायर्ड शिक्षक भोगीलाल भोय पर्यावरण दिवस पर सुबह स्नान करने के बाद सनातनी संस्कृति अनुरूप धोती पहनकर विधिवत पूजा अर्चना कर वृक्षारोपण करता है। यह एक अजीब संयोग ही है 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है और गुरुजी का जन्मदिन भी है। पिछले 26 सालों से हर वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस पर एक पेड़ मां के नाम लगाते हैं। यह उद्यान भी माता सुभद्रा के नाम समर्पित है। लगभग दो एकड़ में फैले इनका खेत अब फलता फूलता उद्यान बन गया है। लगभग एक सौ विभिन्न प्रजाति के आम के पेड़ अब फल देने लगे हैं। इस उद्यान में 18 नींबू के अलावा संतरा , मुसंबी, चीकू ,करमंगा, अनार सहित अन्य फलदार पौधे लगाए गए हैं। साथ ही घेराव में ही बांस,और इमरती लकड़ी के रूप में प्रसिद्ध सागौन के पेड़ भी लह लहा रहे हैं।
भोगीलाल गुरुजी ने बताया कि वह अपने माता पिता के स्मृति को अक्षुण्ण रखने तथा पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के साथ साथ आध्यात्मिक दृष्टांत पेश करते हुए कहा कि पेड़ लगाना पुण्य का काम है।जिस प्रकार दस कुंआ खोदने से एक तालाब खोदने के बराबर पुण्य मिलता है उसी तरह दस तालाब खोदने से जो पुण्य मिलता है एक पेड़ लगाने से वही पुण्य मिलता है। पूजा अर्चना कर वृक्षारोपण करने से पेड़ों को शक्ति मिलती है वह पेड़ सदा प्रफुल्लित रहता है। जिस तरह बच्चों के जन्म से लेकर शिक्षा संबंधी अनेक संस्कार करते हैं उसी तरह वृक्षारोपण पूजा पाठ करके लगाने से यह वृक्षरोपण संस्कार कहा जाता है।











