छत्तीसगढ़ के वन्य जीव प्रेमी वैभव जगने ने मीडिया जगत से विनम्र आग्रह किया है कि हाथी अथवा अन्य किसी भी वन्य जीव के नाम के आगे “आतंक”, “आदमखोर”, “दहशत”, “आक्रामक हत्यारा” जैसे शब्दों का प्रयोग करने से बचा जाए। ऐसे शब्द समाज में वन्य जीवों के प्रति नकारात्मक धारणा उत्पन्न करते हैं तथा संरक्षण प्रयासों को प्रभावित करते हैं।
उन्होंने कहा कि हाथी और अन्य वन्य जीव प्राकृतिक आवास में रहने वाले जीव हैं। मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं के पीछे अनेक कारण होते हैं, जिनमें मानव गतिविधियां, वन क्षेत्रों में अतिक्रमण, वन्य जीवों को उकसाना तथा सुरक्षा नियमों की अनदेखी भी शामिल है।
वैभव जगने ने मीडिया से यह भी आग्रह किया कि हाथी प्रभावित क्षेत्रों में कुछ उपद्रवी तत्वों द्वारा वन्य जीवों को परेशान करने, उनका पीछा करने, उन पर पत्थर फेंकने, तेज आवाज करने या उन्हें उकसाने जैसी घटनाओं का भी निष्पक्ष उल्लेख किया जाए। इससे आम जनता को वास्तविक परिस्थितियों की जानकारी मिलेगी और मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारणों को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि अधिकांश दुर्घटनाओं और जनहानि की घटनाओं में मानव पक्ष की लापरवाही भी एक महत्वपूर्ण कारण होती है। इसलिए आवश्यक है कि जागरूकता, सतर्कता और सह-अस्तित्व को बढ़ावा दिया जाए तथा वन्य जीवों के प्रति संवेदनशील और तथ्यात्मक दृष्टिकोण अपनाया जाए।












