April 22, 2026

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आदित्य बिजनेस पार्क काम्पलेक्स के सामने खड़ी बाईक में अचानक लगी आग, मची अफरा-तफरी, बाईक जलकर पूरी तरह हुई खाक 36 किलो गांजा के साथ 3 तस्कर गिरफ्तार, 15 लाख से अधिक की संपत्ति जब्त, बंगुरसिया ढाबा के पास नाकेबंदी में कार समेत दबोचे गए आरोपी जनगणना प्रशिक्षण से घर लौट रहे शिक्षक को कार ने कुचला, सायकल सवार एक अन्य ग्रामीण भी हुआ गंभीर, जांच में जुटी पुलिस “अंतरराज्यीय उठाईगिरी-लूट गैंग का भंडाफोड़”, रायगढ़ पुलिस ने मास्टरमाइंड को दबोचा, कई वारदातों का खुलासा, आरोपी ने 15 से ज्यादा चोरी, लूट और उठाईगिरी की घटनाएं कबूली शादी कार्ड बांटने निकले युवक की सड़क हादसे मौत, रात के अंधेरे में गड्ढे में गिरने से हुई घटना, परिजनों में पसरा मातम पल्सर मोटर सायकल की टक्कर से एक शख्स की मौत, शादी समारोह शामिल होनें जाते समय सड़क में गिरे टोपी उठाते समय हुई घटना
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पुसौर में अधिकारी महीनों से मुख्यालय से गायब, जनप्रतिनिधि खुलकर लगा रहे आरोप

रायगढ़: पुसौर में मनरेगा की करोड़ों रुपए की योजनाएं अब कागजी शेर बनकर रह गई हैं। ग्रामीण और जनप्रतिनिधि खुलकर आरोप लगा रहे हैं कि जनपद के अधिकांश मनरेगा अधिकारी महीनों से मुख्यालय में दिखाई नहीं देते। न रहते हैं पुसौर में, न आते हैं दफ्तर। फिर भी वेतन पूरा, टीए-डीए पूरा और काम? वो तो कागजों में ही पूरा-पूरा!
जनपद पंचायत पुसौर के तकरीबन 70-80% तकनीकी स्टाफ और प्रोग्राम अधिकारी रायपुर, बिलासपुर या रायगढ़ शहर में किराए के मकान लेकर आराम फरमा रहे हैं। सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक का दफ्तर कभी-कभार ही खुलता है। ग्राम पंचायतों से जब सचिव या रोजगार सहायक फाइल लेकर आते हैं तो ताला लटका मिलता है। मजदूरों की हाजिरी, मस्टरोल, मटेरियल बिल—सब कुछ “व्हाट्सएप गवर्नेंस” से पास हो रहा है।
ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस वर्ष मनरेगा में वृक्षारोपण के नाम पर करीब ढाई करोड़ रुपए से ज्यादा का प्रावधान था। कागजों में दिखाया गया है कि हजारों-हजार पौधे लगाए गए, गड्ढे खोदे गए, पानी डाला गया, घेरा बनाया गया। लेकिन जब ग्रामीणों से पूछो तो जवाब एक ही—“साहब, पौधा तो कागज में ही लगा दिए, असल में तो एक भी नहीं दिख रहा।”
कई पंचायतों में तो पौधे लगाने की जगह पहले से मौजूद जंगल के पेड़ों को ही “नया वृक्षारोपण” दिखा दिया गया। कुछ जगहों पर तो पौधे लगाए गए, लेकिन न पानी, न सुरक्षा—एक महीने में ही सूख गए। जीवित पौधों का प्रतिशत कागजों में 95% से ऊपर, धरती पर 5% भी मुश्किल से। मजदूर बताते हैं कि कई पंचायतों में 3-4 महीने से मजदूरी नहीं मिली। जब सचिव भुगतान के लिए जनपद आते हैं तो अधिकारी “आज नहीं हैं, कल आना” कहकर टाल देते हैं। फाइलें महीनों धूल फांकती रहती हैं। परेशान होकर मजदूर अब काम पर जाना ही छोड़ने लगे हैं।
सरपंच संघ और जनपद सदस्यों ने एक स्वर में मांग की है कि जनपद पंचायत पुसौर में सभी मनरेगा अधिकारियों और तकनीकी स्टाफ का मुख्यालय में निवास अनिवार्य किया जाए। बायोमेट्रिक हाजिरी लगे, CCTV लगे और हर महीने कम से कम 20 दिन मुख्यालय में उपस्थिति जरूरी हो। साथ ही पूरे जनपद में चल रहे सभी मनरेगा कार्यों, खासकर वृक्षारोपण की हाई लेवल जांच कराई जाए।
जिला पंचायत के मनरेगा सेल को कई बार शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्दी ही ठोस कदम नहीं उठाए गए तो वे कलेक्टर कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।

Sailaab News
Author: Sailaab News

Owner name : ajay kumar khatri

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