August 4, 2026

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मृतक संस्कार के कार्यो में पगडी रस्म की जगह पगड़ी संस्कार शब्दों का हो प्रयोग, एडवोकेट, सामाजिक कार्यकर्ता कमल अंबवानी का हिंदु समाज के लोगों से निवेदन

.रायगढ़ . रायगढ़ शहर के सीनियर एडवोकेट, सामाजिक कार्यकर्ता कमल अंबवानी ने मृतक संस्कार कार्यों में प्रयोग होने वाले शब्दों पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा है कि हिंदू धर्म में कुछ जाति विशेष जैसे सिंधी, मारवाड़ी (अग्रवाल) व अन्य में परिजनो के देहांत के पश्चात में अंतिम संस्कार में दिवंगत की देहानि, तथा अन्य परंपरा के अनुपालन के साथ पगड़ी रस्म भी होती है,
पगड़ी रस्म में यह रस्म ‘शब्द उर्दू है किन्तु हम हिंदू है हमारे शब्द हिंदू धर्म में संस्कृत तथा हिंदी के ही होते है, जिस तरह आम के वृक्ष के फल आम का फल, पत्ते भी आम के होते हैं, उसी तरह पगड़ी रस्म जो कि अंतिम संस्कार के अंतर्गत आता है, अतः शाब्दिक शुद्धता इसे “पगड़ी संस्कार” कहना श्रेष्ठ होगा, सामाजिक कार्यकर्ता कमल अंबवानी ने बताया कि मेरे द्वारा इस विषय में एक वर्ष से प्रयास हिन्दू जन जागृति हेतु किया जा रहा है, तथा शनैः शनैः इसमें सफलता भी प्राप्त हो रही है, इसे प्रभावी तथा व्यापक स्वरूप देने हेतु आपके सहयोग का आकांक्षी हूँ, कुछ साहित्यकार व विद्वान कहते हैं कि हिंदी माँ है, तथा उर्दू मौसी है, अतः मौसी के निवास बहुत दिन रह लिए हैं, पगड़ी संस्कारशब्द का प्रयोग करके अब माँ के घर लौटना भी आवश्यक हो चुका है, पगड़ी रस्म नहीं कहकर पगड़ी संस्कार कहना हमारे वैदिक स्वरूप और शाब्दिक शुद्धता के साथ साथ सनातन धर्म की दिशा में पुनः आगमन सिद्ध होगा, कमल अंबवानी ने हिंदू समाज के सभी लोगों से आग्रह किया है, कि वे इस विषय पर गहन चिंतन कर समय-समय पर पगड़ी रस्म की जगह पगड़ी संस्कार शब्दों का प्रयोग करें तथा जन जागरुकता की दिशा में अधिक से अधिक लोगों पर इन बातों को पहुंचाये भी

Sailaab News
Author: Sailaab News

Owner name : ajay kumar khatri

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