रायगढ़ । वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रायगढ़ शशि मोहन सिंह ने 29 मई को सामाजिक सरोकारों से जुड़े दो महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में सहभागिता कर संवेदनशील पुलिसिंग और समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का परिचय दिया। एसएसपी श्री सिंह अपनी पत्नी श्रीमती रेखा सिंह एवं पुत्र ऋभु समर्थ सिंह के साथ मातृ निलियम संस्था में आयोजित दत्तक ग्रहण समारोह में शामिल हुए।
मातृ निलियम संस्था द्वारा अब तक 128 बच्चों को विधिवत कानूनी प्रक्रिया के तहत निःसंतान दंपत्तियों को सौंपा जा चुका है। समारोह में 129वें बच्चे के दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया के तहत एसएसपी शशि मोहन सिंह एवं उनकी पत्नी द्वारा आवेदनकर्ता दंपत्ति को प्रतीकात्मक रूप से बच्चा सौंपा गया। आगामी वैधानिक प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद बच्चा विधिवत रूप से दंपत्ति को प्राप्त होगा। इस अवसर पर एसएसपी ने दंपत्ति को शुभकामनाएं देते हुए उनके जीवन के इस महत्वपूर्ण और भावनात्मक क्षण पर बधाई दी।
कार्यक्रम पश्चात एसएसपी शशि मोहन चक्रधरनगर स्थित उन्नायक समिति द्वारा संचालित “नव जीवन” व्यसन मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र पहुंचकर वहां भर्ती युवाओं से आत्मीय संवाद किया। इस दौरान उन्होंने नशा छोड़ने के लिए प्रयासरत युवाओं का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और नशे से हमेशा के लिए दूरी बनाने की सीख दी।
एसएसपी श्री सिंह ने युवाओं से कहा कि नशा केवल व्यक्ति का स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि उसका परिवार, भविष्य और सामाजिक सम्मान भी छीन लेता है। उन्होंने कहा कि अधिकांश अपराधों की जड़ में किसी न किसी रूप में नशा शामिल होता है, इसलिए नशे से दूर रहना स्वयं, परिवार और समाज के हित में आवश्यक है। उन्होंने पुनर्वास केंद्र में भर्ती युवाओं से कहा कि वे यहां मिले अवसर का पूरा लाभ उठाएं और केंद्र से बाहर निकलने के बाद दोबारा किसी भी प्रकार के नशे की ओर वापस न लौटें।
एसएसपी ने कहा कि रायगढ़ पुलिस जिले में “ऑपरेशन आघात” के माध्यम से शराब, गांजा, नशीली दवाओं, प्रतिबंधित इंजेक्शनों तथा अन्य मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के विरुद्ध लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है। लेकिन इस अभियान का उद्देश्य केवल नशे के कारोबारियों पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि नशे की गिरफ्त में आ चुके युवाओं और नाबालिगों को इस दलदल से बाहर निकालकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना भी है।
उन्होंने कहा कि रायगढ़ पुलिस ऐसे युवाओं के पुनर्वास, मार्गदर्शन और रोजगार से जोड़ने के प्रयासों पर भी काम करेगी, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें। इसके लिए प्रशासन, पुलिस, समाज कल्याण विभाग, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा आमजन के सहयोग की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सामूहिक प्रयासों से नशे के कारण भटके युवाओं को नई दिशा देकर उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाया जा सकता है।











