रायगढ़ । वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के दिशा निर्देशन पर जिले में गौवंश तस्करी एवं पशु क्रूरता पर प्रभावी अंकुश लगाने चलाए जा रहे “ऑपरेशन शंखनाद” के तहत थाना लैलूंगा पुलिस ने साहसिक कार्रवाई करते हुए 20 गौवंशों को तस्करों के चंगुल से मुक्त कराया है। यह कार्रवाई गुरुवार की रात ग्राम कमरगा के घने जंगल में की गई, जहां तस्कर गौवंशों को पैदल हांकते हुए ओडिशा की ओर ले जा रहे थे।
पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ तस्कर गौवंशों को मारते-पीटते जंगल के रास्ते बूचड़खाने ले जाने की तैयारी में हैं। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी लैलूंगा उप निरीक्षक गिरधारी साव अपनी टीम के साथ तत्काल ग्राम कमरगा पहुंचे। ग्रामीणों से पूछताछ कर उन्हें गवाह के रूप में साथ चलने के लिए कहा गया, लेकिन ग्रामीणों ने जंगल में रात के समय अजगर एवं जहरीले सांपों के निकलने की बात कहकर जाने से इंकार कर दिया। इसके बावजूद पुलिस टीम ने ग्रामीणों को समझाइश देकर साथ लिया और रात में ही जंगल के भीतर सर्च अभियान शुरू किया।
घने जंगल और अंधेरे के बीच पुलिस टीम ने चारों ओर से घेराबंदी की। अभियान के दौरान टीम का सामना एक विशाल अजगर से भी हुआ, लेकिन पुलिसकर्मियों ने सूझबूझ और सतर्कता के साथ आगे बढ़ते हुए मवेशियों तक पहुंच बनाई। मौके पर 20 गौवंश जिनमें गाय, बछिया और बछड़े शामिल थे, लावारिस अवस्था में मिले। पुलिस की मौजूदगी की भनक लगते ही तस्कर अंधेरे और जंगल का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए।
पुलिस ने आसपास के ग्रामीणों से मवेशियों के मालिक के संबंध में पूछताछ की, लेकिन कोई दावा करने नहीं आया। इसके बाद गवाह कन्हैयालाल चौहान एवं ग्राम कोटवार गणेश राम चौहान की उपस्थिति में धारा 106 बीएनएसएस के तहत विधिवत कार्रवाई कर सभी 20 गौवंशों को जप्त किया गया। जप्तशुदा गौवंशों को सुरक्षित देखभाल के लिए सलखिया गौशाला के अध्यक्ष जोगीराम भोय को अस्थायी सुपुर्दगी में सौंपा गया है।
गौवंश तस्करों की पहचान एवं गिरफ्तारी के लिए पुलिस द्वारा आगे की जांच की जा रही है। ऑपरेशन शंखनाद के तहत जिले में गौवंश तस्करी और पशु क्रूरता के मामलों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है तथा ऐसे अपराधों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।
इस सराहनीय कार्रवाई में थाना प्रभारी लैलूंगा उप निरीक्षक गिरधारी साव, सहायक उप निरीक्षक परमेश्वर नाथ सिंह पैंकरा, प्रधान आरक्षक जयशरण चंद्रा, आरक्षक शशिभूषण साहू, विकास तिर्की एवं सुमीत एक्का की महत्वपूर्ण भूमिका रही।











