रायगढ़। शहर के राजापारा स्थित महाप्रभु जगन्नाथ मंदिर में रियासत काल से उड़ीसा के जगन्नाथ पुरी की तरह भगवान महाप्रभु के जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव को ऐतिहासिक एवं यादगार ढंग से मनाने की परंपरा चली आ रही है। इस बार भी श्री जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट उत्कल सांस्कृतिक सेवा समिति, राजपरिवार के सदस्यगण व शहर के श्रद्धालुगण मिलकर श्रद्धा व भव्यता से मना रहे हैं। शहर में चार जगह से रथयात्रा निकालने की पुरानी परंपरा रही है, जिसमें जगन्नाथ मंदिर राजापारा सहित चांदनी चौक, प्रगतिकला मंदिर सोनारपारा और अग्रहरि समाज गांजा चौक के द्वारा रथ यात्रा निकाली जाती रही है।
विगत दिवस आषाढ शुक्लपक्ष प्रतिपदा 15 जुलाई बुधवार की सुबह 11 बजे श्रीजगन्नाथ मंदिर का कपाट खुला एवं नेत्र उत्सव जिसे ‘नबाजौबन’ दर्शन के नाम से भी जाता है का आयोजन किया गया व उस दिन भगवान के नेत्र खुल जाते हैं, जिसकी खुशी में नेत्रोत्सव उत्सव श्रद्धा व धूमधाम मनाया गया व भगवान को काजल लगाकर नवयौवन श्रृंगार किया गया व महाआरती एवं छप्पन भोग का प्रसाद अर्पित किया गया। वहीं आज 17 जुलाई को जगन्नाथ महाप्रभु मंदिर से ऐतिहासिक रथ यात्रा निकाली गयी व महाप्रभु विशाल मनभावन रथ में विराजित होकर अपने भक्तों को दर्शन देते हुए अपनी मौसी गुंडिचा के घर निकले व समूचा अंचल पवित्र मंत्र हरि बोलो व जय जगन्नाथ के पावन मंत्र से गुंजित हो गया। इस साल रथयात्रा मे राधा कृष्ण की नृत्यात्मक प्रस्तुति,ढोल,धमाल और गड़ाई बजा विशेष आकर्षण का केंद्र रहे।
राजापारा स्थित महाप्रभु जगन्नाथ मंदिर में सुबह सुयोग्य पंडितों के सानिध्य में विधि विधान से पूजा अर्चना की गई। वहीं आज 17 जुलाई शुक्रवार को शाम 4 बजे से पवित्र रथ यात्रा में महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र एवं सुभद्रा के साथ रथ पर आरूढ़ होकर अपनी मौसी रानी गुंडिचा देवी के यहां जाने हेतु निकले। जिसमें शहर के गणमान्य नागरिकगण व श्रद्धालुगण शामिल हुए व प्रसाद ग्रहण किए।
शहर में रथयात्रा महोत्सव को धूमधाम से मनाने की परंपरा रही है। वहीं आज रथोत्सव के दिन राजमहल स्थल के पास शहर के अतिरिक्त दूर दराज स्थानों से हजारों श्रद्धालुगण महाप्रभु का दर्शन पूजन करने व रथ शोभायात्रा में शामिल होकर महाप्रभु का रथ खींचने पहुँचे। वहीं राजापारा में सुबह से रात तक मेला सा माहौल रहा व पुलिस विभाग व यातायात विभाग के अधिकारी व कर्मचारीगण व्यवस्था को बेहतर बनाने में सजग रहे। इसी तरह राजमहल के सामने उत्कलिका (महिला समूह) द्वारा मेला का आयोजन भी किया गया। जिसका आनंद लोगों ने लिया।
राजापारा भगवान जगन्नाथ मंदिर में रथोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। इसके अतिरिक्त शहर के विभिन्न मोहल्ले में भी रथयात्रा निकाली जाती है। शहर में चार जगह से रथयात्रा निकालने की पुरानी परंपरा रही है, जिसमें जगन्नाथ मंदिर राजापारा सहित चांदनी चौक, प्रगतिकला मंदिर सोनारपारा और अग्रहरि समाज गांजा चौक के द्वारा रथ यात्रा निकाली जाती रही है। इसके अलावा शहर के अनेक मोहल्ले में भी भगवान जगन्नाथ महाप्रभु जी की पूजा अर्चना कर प्रसाद श्रद्धालुओं ने बांटे। वहीं बच्चों में भी रथोत्सव की खुशियाँ देखते ही बनी उन्होंने भी श्रद्धा से पूजा दृ अर्चना की।
रायगढ़ की परम्परा अनुसार इस दिन भगवान अपने भक्तों को दर्शन देने नगर में निकलेंगे। इस दिन महाप्रभु का रथ राज महल प्रांगण से निकलकर मौसी घर जायेगा। जहां से भगवान के श्री विग्रहों को मान्यता स्वरूप गुंडिचा मंदिर में रखा जायेगा, वहां महाप्रभु 7 दिनों तक रहेंगे।
रथोत्सव धार्मिक कार्यक्रम के अन्तर्गत आगामी 25 जुलाई शनिवार को शाम 4 बजे से बाहुड़ा रथ यात्रा निकलेगी व उस दिन भगवान श्री जगन्नाथ जी अपने भाई बलभद्र जी एवं बहन सुभद्रा जी के साथ मौसी घर से रथारूढ़ होकर वापस अपने श्री मंदिर में आयेंगे। जहाँ “उत्कलिका मातृशक्ति” द्वारा महाआरती कर स्वागत किया जायेगा।
आगामी 26 जुलाई रविवार को शाम 6 बजे से शहर के जगन्नाथ महाप्रभु ऐतिहासिक मंदिर में वर्ष में सिर्फ एक बार तीनों महाप्रभु अपने बड़े भाई बलभद्र और सुभद्रा के साथ पूर्ण राजकीय भेष में अपने सभी स्वर्ण आभूषणों एवं आयुधों से अंलकृत होकर मंदिर प्रांगण में दर्शन देते हैं। इस दिन महालक्ष्मी को प्रसन्न करने हेतु रसगुल्ले का भोग लगाया जाता है। वहीं भव्य रथोत्सव यात्रा व धार्मिक आयोजन को भव्यता देने में श्री जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट उत्कल सांस्कृतिक सेवा समिति के सभी श्रद्धालुगण जुटे हैं।











