रायगढ़. रायगढ़ की 150 वर्ष से अधिक प्राचीन रियासतकालीन श्री जगन्नाथ मंदिर में गुरुवार को भगवान श्री जगन्नाथ, बड़े भाई श्री बलभद्र एवं बहन देवी सुभद्रा का पावन नेत्रोत्सव (नवयौवन दर्शन) वैदिक मंत्रोच्चार एवं पारंपरिक विधि-विधान के साथ श्रद्धा एवं भक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ। अनासर अवधि के उपरांत महाप्रभु के प्रथम नवयौवन दर्शन के लिए मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी जीभीड़ उमड़ी और पूरा परिसर शंखध्वनि, घंटानाद एवं जय जगन्नाथ के जयघोष से गुंजायमान रहा।
स्नान पूर्णिमा के पश्चात भगवान के दिव्य विग्रहों को परंपरा के अनुसार अनासर अवधि में रखा जाता है। इस अवधि के समापन पर नेत्रों का पुनः अंकन एवं नवयौवन श्रृंगार किया जाता है, जिसे नेत्रोत्सव कहा जाता है। गुरुवार को मंदिर के सेवायतों एवं वैदिक आचार्यों ने गोपनीय धार्मिक परंपराओं के अनुरूप यह अनुष्ठान संपन्न कराया।
छेरा पहरा राजा सतवीर बहादुर सिंह, कुमार अभ्युदय बहादुर सिंह, राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह, कुमार विश्वविजय सिंह, कुमार त्रिशिवम राजे सिंह ने किया। रियासतकालीन परंपरा के अनुसार 16 जुलाई को भगवान श्री जगन्नाथ, श्री बलभद्र एवं देवी सुभद्रा को पवित्र रथ पर विराजमान कराया गया है। महाप्रभु का पावन नंदीघोष रथ आज विमला माता मंदिर (मानक चौक, मां समलेश्वरी मंदिर के समीप) श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ विराजमान रहेगा।
17 जुलाई को रायगढ़ की ऐतिहासिक रियासतकालीन परंपरा के अनुरूप भव्य रथयात्रा निकलेगी, जिसमें महाप्रभु अपने भाई-बहन के साथ मौसीबाड़ी (गुंडीचा मंदिर) के लिए प्रस्थान करेंगे। रथयात्रा महोत्सव की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा के लिए श्री जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट, उत्कल सांस्कृतिक सेवा समिति एवं राजपरिवार रायगढ़ द्वारा जिला प्रशासन के सहयोग से व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं।
रायगढ़ की रियासतकालीन श्री जगन्नाथ रथयात्रा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि नगर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता एवं सनातन परंपराओं का जीवंत प्रतीक है, जो डेढ़ शताब्दी से अधिक समय से निरंतर आयोजित होती आ रही है। इस वर्ष भी रथयात्रा महोत्सव पारंपरिक वैभव, श्रद्धा एवं गरिमा के साथ आयोजित किया जा रहा है।











