रायपुर । छत्तीसगढ़ की आगामी विधानसभा राजनीति को लेकर भारतीय जनता पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से अलग एक वैकल्पिक राजनीतिक मंच के गठन की कवायद तेज हो गई है। तीसरे मोर्चे से सिरिल कुमार द्वारा बताया गया कि रायपुर के तेलीबांधा स्थित होटल बेबीलॉन कैपिटल में विभिन्न क्षेत्रीय राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों एवं राजनीतिक मोर्चों के प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण संयुक्त बैठक आयोजित की गई।
बैठक का मुख्य उद्देश्य विभिन्न वैचारिक एवं सामाजिक पृष्ठभूमि वाले संगठनों के बीच साझा न्यूनतम राजनीतिक कार्यक्रम तैयार करना तथा छत्तीसगढ़ के स्थानीय मुद्दों को केंद्र में रखकर एक लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक राजनीतिक विकल्प की संभावनाओं पर विचार करना रहा।
बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि अलग-अलग दल अपनी स्वतंत्र पहचान और विचारधारा बनाए रखते हुए जल, जंगल, जमीन, स्थानीय रोजगार, किसान, आदिवासी अधिकार, सामाजिक न्याय, क्षेत्रीय अस्मिता, विकेंद्रीकरण, पारदर्शी शासन और भ्रष्टाचार निरोध जैसे साझा मुद्दों पर न्यूनतम साझा कार्यक्रम तैयार कर सकते हैं।
बैठक में शामिल प्रमुख दल एवं संगठन
1. बहुजन समाज पार्टी — प्रतिनिधि मंडल, जोन प्रभारी खटकर जी
2. छत्तीसगढ़िया पार्टी — देवराज साहू
3. छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच — पुरन लाल साहू
4. गोंडवाना गणतंत्र पार्टी — मिथलेश कुमार
5. भीम आर्मी / आजाद समाज पार्टी — मनोज बंजारे
6. जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) — जितेन्द्र बंजारे
7. हमर राज पार्टी — विनोद नागवंशी
8. बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा — नवनीत चाँद
9. छत्तीसगढ़ महतारी पार्टी — विवेक पटेल
बैठक में उपस्थित प्रतिनिधियों ने कहा कि तीसरे मोर्चे का उद्देश्य केवल चुनावी गठबंधन बनाना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के हितों पर आधारित साझा राजनीतिक एजेंडा तैयार करना होना चाहिए। इसके लिए आगामी बैठकों में साझा न्यूनतम कार्यक्रम, संगठनात्मक समन्वय, संभावित सीटों पर आपसी तालमेल तथा संयुक्त घोषणापत्र सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा आगे बढ़ाई जाएगी।
जल-जंगल-जमीन और स्थानीय अधिकार होंगे प्रमुख मुद्दे
प्रतिनिधियों ने कहा कि छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक संसाधनों से प्राप्त होने वाले लाभ में स्थानीय समुदायों की भागीदारी, आदिवासी एवं पारंपरिक समुदायों के संवैधानिक अधिकार, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, किसानों की आय, शिक्षा, स्वास्थ्य, नगरीय सुविधाएं तथा प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाने की आवश्यकता है।
बैठक में यह भी विचार रखा गया कि राज्य की क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकेंद्रीकृत विकास मॉडल और स्थानीय निर्णय प्रक्रिया को मजबूत किया जाना चाहिए।
निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग
बैठक में भारत निर्वाचन आयोग की संवैधानिक भूमिका पर भी चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव की विश्वसनीयता के लिए मतदाता सूची, चुनाव कार्यक्रम, मतदान, मतगणना, चुनावी व्यय, शिकायत निवारण तथा अन्य सभी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और समान अवसर सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।
प्रतिनिधियों ने निर्वाचन आयोग से मांग की कि चुनाव प्रक्रिया से संबंधित सभी निर्णय संविधान, निर्वाचन कानून, नियमों और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुरूप पारदर्शी तरीके से किए जाएं तथा राजनीतिक दलों और मतदाताओं के समक्ष आवश्यक सूचनाएं समयबद्ध रूप से सार्वजनिक की जाएं।
यह मांग किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध आरोप के रूप में नहीं, बल्कि स्वतंत्र एवं निष्पक्ष निर्वाचन की संवैधानिक भावना और जनता के विश्वास को मजबूत करने की मांग के रूप में रखी गई। भारत निर्वाचन आयोग स्वयं अनुच्छेद 324 के अंतर्गत चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन एवं नियंत्रण की संवैधानिक जिम्मेदारी निभाता है।
दूसरे चरण की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय संभावित
बैठक में तय किया गया कि व्यापक स्तर पर विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों से संवाद जारी रखा जाएगा। आगामी चरण में:
– साझा न्यूनतम कार्यक्रम तैयार करना
– संगठनात्मक समन्वय की रूपरेखा बनाना
– विधानसभा क्षेत्रों में आपसी तालमेल पर चर्चा
– संभावित सीटों पर समन्वय की प्रक्रिया तय करना
– संयुक्त घोषणापत्र का प्रारूप तैयार करना
– लोकतांत्रिक एवं पारदर्शी निर्णय प्रणाली विकसित करना
जैसे विषयों पर विस्तार से विचार किया जाएगा।
प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि तीसरे मोर्चे की सफलता का आधार केवल दलों की संख्या नहीं, बल्कि साझा नीति, संगठनात्मक अनुशासन, जनता के स्थानीय मुद्दों से जुड़ाव और पारदर्शी राजनीतिक कार्यप्रणाली होगी।
बैठक में उपस्थित नेताओं ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता के समक्ष ऐसा राजनीतिक विकल्प रखने का प्रयास किया जाएगा जो संविधान, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, क्षेत्रीय हित और जवाबदेह शासन को अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं के केंद्र में रखे।










