June 23, 2026

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सरकारी स्कूलों में धार्मिक गतिविधियों पर रोक के आदेश का आदिवासी समाज ने किया विरोध, संयुक्त ज्ञापन सौंपकर निरस्तीकरण की मांग सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा के लिए जिले से 17 श्रद्धालु हुए रवाना, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने दी शुभकामनाएं, छत्तीसगढ़ सरकार की तीर्थ दर्शन पहल से श्रद्धालुओं का सपना हो रहा साकार प्रदेश का सबसे मॉडल शहर बनेगा रायगढ़: वित्त मंत्री ओ.पी.चौधरी, नगर निगम क्षेत्र में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों का वित्त मंत्री ने किया निरीक्षण प्रत्येक आवेदन पर संवेदनशीलता और गंभीरता से करें कार्रवाई-कलेक्टर, जनदर्शन में सुनी गईं आमजन की समस्याएं, अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश आदिवासी समन्वय समिति धर्म कोड एवं विभिन्न मुद्दों/ समस्याओं को लेकर सौपा यापन ऑपरेशन शंखनाद के तहत रायगढ़ पुलिस की कार्रवाई, 14 गौवंशों को तस्करों के चंगुल से कराया मुक्त, क्रूरतापूर्वक हांकते-पीटते बूचड़खाने ले जा रहे दो आरोपियों को धरमजयगढ़ पुलिस ने दबोचा
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पेड़ के नीचे पढ़ने को मजबूर नौनिहाल, 5 साल से अधूरा पड़ा स्कूल भवन दे रहा शिक्षण व्यवस्था को चुनौती

सारंगढ़. शिक्षा के अधिकार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के सरकारी दावों के बीच सारंगढ़ जिले के वन ग्राम शिवपुरी की तस्वीर बेहद चिंताजनक है। जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर और प्रसिद्ध पर्यटन स्थल टमटोरा रेस्ट हाउस से महज एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित प्राथमिक शाला शिवपुरी में मासूम बच्चे आज भी पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
जानकारी के अनुसार, गांव का पुराना स्कूल भवन जर्जर होने के कारण उसे तोड़ दिया गया था। इसके बाद वर्ष 2021-22 में डीएमएफ मद से नए भवन निर्माण की स्वीकृति मिली और निर्माण कार्य शुरू हुआ, लेकिन ग्राम पंचायत की लापरवाही और सुस्त कार्यप्रणाली के चलते पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी भवन अधूरा पड़ा हुआ है।
स्कूल भवन अधूरा रहने के कारण विद्यालय का संचालन वन विभाग के पुराने और जर्जर परिसर रक्षक भवन में किया जा रहा है। इस भवन में न बिजली की व्यवस्था है और न ही पंखे की सुविधा। भीषण गर्मी और उमस से परेशान शिक्षक मजबूरी में तालाब किनारे इमली के पेड़ की छांव में बच्चों की कक्षाएं संचालित कर रहे हैं।
बरसात के मौसम में हालात और भी भयावह हो जाते हैं। जिस भवन में स्कूल संचालित हो रहा है, उसकी छत जगह-जगह से टपकती है। वन विभाग करीब 15 वर्ष पहले ही इस भवन को अनुपयोगी घोषित कर छोड़ चुका है। ऐसे में बारिश के दौरान बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी, यह बड़ा सवाल बन गया है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि टमटोरा संकुल के अंतर्गत आने वाले इस विद्यालय का पिछले पांच वर्षों में विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) और जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) द्वारा एक बार भी निरीक्षण नहीं किया गया। निरीक्षण के नाम पर केवल संकुल प्राचार्य और समन्वयक की औपचारिक उपस्थिति ही दर्ज होती रही।
विद्यालय के प्रधानपाठक दारा सिंह सिदार ने बताया कि स्कूल की बदहाल स्थिति और भवन निर्माण में हो रही देरी को लेकर कई बार विभागीय अधिकारियों को लिखित पत्र भेजे गए, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार शिक्षा के क्षेत्र में करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा कर रही है, तब वनांचल के मासूम बच्चों को बुनियादी सुविधाओं से आखिर क्यों वंचित रखा जा रहा है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता और ग्राम पंचायत की लापरवाही के बीच इन बच्चों का भविष्य यूं ही अधर में लटका रहेगा, या फिर प्रशासन इस गंभीर समस्या पर जल्द कोई ठोस कदम उठाएगा?

Sailaab News
Author: Sailaab News

Owner name : ajay kumar khatri

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