रायपुर। शारदीय नवरात्रि की महाष्टमी के पावन अवसर पर राजधानी रायपुर में भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ललित महल में ‘रास गरबा विथ भजन डांडिया’* महोत्सव में शामिल हुए।
मुख्यमंत्री के पहुंचते ही आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं और समाजजनों ने उनका आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने मां आदिशक्ति दुर्गा के समक्ष शीश नवाया, पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।
“गरबा हमारी संस्कृति और मातृशक्ति के सम्मान का प्रतीक”
मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों को शारदीय नवरात्रि और महाष्टमी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि नवरात्रि केवल शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा की आराधना का महापर्व नहीं है, बल्कि यह हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, सामाजिक एकता और मातृशक्ति के सम्मान का उत्सव भी है।
उन्होंने कहा कि गरबा और दुर्गा पूजा जैसे आयोजन हमारी आस्था और परंपराओं को जीवंत रखते हुए समाज को प्रेम, सद्भाव और भाईचारे के सूत्र में जोड़ते हैं।
“अब छत्तीसगढ़ के बेटे-बेटी सुरक्षित हैं”
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा —
> “अब छत्तीसगढ़ के बेटे-बेटी सुरक्षित हैं, माता रानी की कृपा से हमने नक्सलवाद खत्म कर दिया।”
उन्होंने कहा कि माता रानी के आशीर्वाद और सरकार के सतत प्रयासों से प्रदेश में शांति और सुरक्षा का माहौल बना है। अब प्रदेश के युवा बिना भय के शिक्षा, रोजगार, संस्कृति और विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। गांव-गांव में विकास पहुंच रहा है और छत्तीसगढ़ तेजी से प्रगति की ओर बढ़ रहा है।
मातृशक्ति और महिला सशक्तिकरण पर जोर..
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर महिला सशक्तिकरण का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि जब नारी शक्ति सशक्त होती है, तभी समाज और प्रदेश सशक्त होता है। गरबा महोत्सव मातृशक्ति के सम्मान का ही प्रतीक है।
कई आयोजनों में हुए शामिल
ललित महल के अलावा मुख्यमंत्री साय ने राजधानी के अन्य गरबा महोत्सवों और दुर्गा पूजा पंडालों में भी शिरकत की।
हर जगह श्रद्धालुओं ने गरबा, भजन और डांडिया के साथ मुख्यमंत्री का स्वागत किया।
भक्ति के साथ उमंग का माहौल
ललित महल में आयोजित गरबा महोत्सव में बड़ी संख्या में युवक-युवतियां, महिलाएं और परिवार पारंपरिक परिधानों में पहुंचे। भजन, डांडिया और गरबा की धुन पर पूरा परिसर भक्तिमय हो गया। मां दुर्गा की आराधना के साथ-साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की यही सांस्कृतिक विरासत प्रदेश की पहचान है, जिसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है।
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